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क़र्ज़माफ़ी बढ़कर 72,000 करोड़ रुपये हुई
कांग्रेस का हाथ, अन्नदाता के साथ

इस वर्ष अपने बजट भाषण में जब वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने केंद्र सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी कृषि ऋण माफी योजना की घोषणा की, जिसमें 4 करोड़ किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ करने का प्रावधान किया गया था, तब इस योजना को एक ऐतिहासिक निर्णय मानकर स्वागत किया गया था। सच है कि इससे पूर्व किसी भी सरकार के पास न तो इतना साहस था और न ही इतने संसाधन थे कि वो पीड़ित किसानों को सीधे नकद राहत पहुंचा सके। परन्तु यू.पी.ए. की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी एवं प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह के गतिशील एवं प्रभावशाली नेतृत्व में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था लगातार 9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है। परिणाम स्वरूप यू.पी.ए. के पास किसानों को राहत पहुंचाने के लिये ऐसे संसाधन उपलब्ध हुए जिससे साधारण करदाता पर बिना कोई अतिरिक्त बोझ लादे यह योजना पूरी की जा रही है। अर्थव्यवस्था की हालत इतनी अच्छी है कि करदाताओं को भी इस वर्ष बड़ी राहत पहुंचायी गयी है।

लोक सभा में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव श्री राहुल गांधी तथा कांग्रेस के कुछ संसद सदस्यों ने इस विषय पर अपना भाषण देते हुए 2 प्रमुख बिन्दु ऋणमाफी योजना के बारे में उठाये थे। इसमें किसानों की वर्तमान 2 हेक्टेयर की जोत की सीमा की पात्रता को निर्धारित करते समय किसानों की भूमि की उत्पादकता एवं असिंचित क्षेत्र के किसानों, खास तौर पर विदर्भ जैसे सूखे क्षेत्र के ऋणमाफी योग्य किसानों की समस्याओं को संज्ञान में नहीं लिया गया था। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि फसल चक्र के आधार पर स्थानीय कटआफ तिथि निर्धारित की जानी चाहिए जिससे कि सभी योग्य किसान ऋणमाफी का फायदा उठा सकें।

इन सुझावों को संज्ञान में लेते हुए संशोधित कृषि ऋणमाफी योजना की घोषणा की गयी यह अधिकतम किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से है, जिसमें लगभग 72 हजार करोड़ रुपये के किसानों के ऋणमाफ किये जायेंगे। इस योजना के प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं -

  • छोटे और सीमान्त किसानों का पूरा ऋण माफ किया जायेगा।

  • ऋण माफी के अंतर्गत अल्पकालीन फसल ऋण के साथ ही निवेश ऋण की सभी ओवरड्यू किस्तें भी शामिल होंगी।

  • अल्पकालीन उत्पादन ऋण के लिये उस राशि को शामिल किया जायेगा, जिसका भुगतान 31 मार्च, 2007 तक हुआ है तथा 31 दिसम्बर, 2007 तक भुगतान ओवरड्यू हो गया है और 28 फरवरी, 2008 तक जिसका भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे सभी ऋण इस योजना के अन्तर्गत आयेंगे।

  • निवेश ऋण के लिये, ऋण की वे सभी किस्ते ब्याज सहित जो ओवरड्यू हैं जिनका 31 मार्च, 2007 तक भुगतान ओवरड्यू हो गया है और 28 फरवरी, 2008 तक जिसका भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे सभी ऋण इस योजना के अंतर्गत आयेंगे।

  • सीमांत कृषक की श्रेणी में वे किसान आयेंगे, जिनकी उत्पादन योग्य कृषि भूमि 1 हेक्टेयर या 2.5 एकड़ है। छोटे किसानों में वे किसान सम्मिलित होंगे जिनकी उत्पादन योग्य कृषि भूमि 1 हेक्टेयर से लेकर 2 हेक्टेयर अर्थात 5 एकड़ है। छोटे और सीमांत किसान लगभग सभी राज्यों में 70 से 94 प्रतिशत तक हैं।

  • अन्य किसानों में वे शामिल हैं जिनके पास 5 एकड़ या 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है। ऐसे किसानों को एकमुश्त समझौता (ओ.टी.एस.) के अन्तर्गत राहत दी जायेगी।

  • अधिकतर सूखी और असिंचित भूमि उन जिलों में है जो सूखा प्रभावित रहते हैं और जो डी.पी.ए.पी. योजना एवं रेगिस्तान विकास योजना (डी.डी.पी.) के अंतर्गत आते हैं।

  • इन 237 जिलों में एक विशेष पैकेज अन्य किसानों की श्रेणी में आने वाले किसानों को दिया जायेगा।

  • इन 237 जिलों में आने वाले अन्य किसानों की श्रेणी के कृषकों को एकमुश्त समझौता योजना के अन्तर्गत ऋण का 25 प्रतिशत अथवारु0 20,000/- जो भी अधिकतम होगा माफ किया जायेगा। जबकि बजट में केवल 25 प्रतिशत की राहत की घोषणा की गयी थी।

  • इसका मतलब यह हुआ कि अन्य किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि ऐसे किसान को 20 हजार रुपये का ऋण बाकी था तो पहले वाली योजना के अंतर्गत उसका केवल 5,000/- माफ होता, जबकि अब पूरा 20,000/- रुपया माफ होगा। इसी प्रकार पहले वाली घोषणा के आधार पर यदि किसी किसान का 60 हजार ऋण ओवरड्यू है तो पहले वाली योजना के अन्तर्गत उसे रु0 15,000/- का ही ऋण माफ होता पर अब उसका रु0 20,000/- का ऋण माफ होगा।

  • इन क्षेत्रों के बड़े किसान जिनके पास 5 एकड़ से अधिक भूमि है का अल्पकालीन फसल औसतन ऋण रु0 19,908/- का है और औसत निवेश ऋण रु0 13,224/- का है। इन आंकड़ों के अनुसार इन 237 जिलों के 60 से 65 प्रतिशत किसान सिर्फ 25 प्रतिशत राहत ही नहीं पायेंगे, वरन उनका पूरा ऋण ही माफ हो जायेगा।

सरल क्रियान्वयन, स्पष्ट निर्देश

  • न तो कोई प्रार्थना पत्र देना है, न कोई प्रमाण पत्र देना है और न कोई दस्तावेज देना है अर्थात बैंक में कुछ भी नहीं देना है।

  • हर शाखा प्रबंधक को 2 सूचियां तैयार करनी हैं।

  • पहली सूची में छोटे और सीमान्त किसान होंगे, जिनका पूरा ऋण माफ होगा। इस सूची में किसान का नाम, ऋण की राशि जो बाकी है और पूर्ण ऋणमाफी का विवरण दिया जायेगा।

  • दूसरी सूची अन्य किसानों की श्रेणी की होगी, इसमें एकमुश्त समझौता राहत 25 प्रतिशत एवं कुछ जिलों में 25 प्रतिशत या रु0 20,000/- जो भी अधिकतम हो, शामिल होंगे।

  • ये दोनों सूचियों को अंतिम रूप दिया जायेगा और यह ऋण देने वाली संस्था के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएंगी।

  • कोई भी किसान अपने बैंक की शाखा में जाकर इस सूची को देख सकता है। इस सूची में उसे अपना नाम या ऋण माफी सूची अथवा ऋण राहत वाली सूची में देखना होगा, जहां ऋण माफी की राशि अथवा ऋण राहत की राशि भी इस सूची में प्रकाशित की गयी है।

  • यह सूची बैंक द्वारा बनाकर नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जायेगी और किसान का ऋण माफ हो जायेगा। किसान को कुछ भी नहीं करना है।
    एकमुश्त समझौता योजना के अन्तर्गत मिली राहत के लिये किसान को 75 प्रतिशत का भुगतान करना होगा, जो वह 30 जून, 2009 तक तीन किस्तों में कर सकता है।

  • 30 जून, 2009 तक बकाया राशि पर इन किसानों से कोई भी ब्याज नहीं लिया जायेगा।

  • यदि किसी किसान को कोई शिकायत है या उसका नाम सही सूची में नहीं है अथवा उसका सूची में नाम ही नहीं है तो वह एक शिकायत-पत्र समस्या निस्तारण अधिकारी को दे सकता है।

  • प्रत्येक बैंक को यह निर्देशित किया गया है कि वे अपने बैंक की शाखाओं की संख्या के आधार पर प्रत्येक अंचल में उतने ही समस्या निस्तारण अधिकारी नियुक्त करें। शिकायत सीधे बैंक को अथवा सीधे समस्या निस्तारण अधिकारी को भेजी जा सकती है।

  • सभी शिकायतों को एकत्र किया जायेगा और उनके निस्तारण की निगरानी की जायेगी। सभी शिकायतें 30 दिन के अन्दर निस्तारित कर दी जायेंगी।
    यह एक सरल, दोषरहित प्रक्रिया है।

  • जैसे ही ऋण माफी अथवा ऋण राहत दे दी जाती है एक प्रमाण पत्र बैंक शाखा द्वारा किसान को दिया जायेगा, जिसमें उसे की गयी ऋणमाफी अथवा ऋण राहत का विवरण होगा।

  • एकमात्र कागज जो किसान के हाथ में होगा वह केवल प्रमाण पत्र होगा।

  • 4 करोड़ 30 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित होंगे। जो कुल किसानों का 70 से लेकर 94 प्रतिशत है। ऋणमाफी योजना 30 जून, 2008 तक पूरी कर ली जायेगी।

    राहुल गांधी ने कहा है कि गरीबी से ऊपर उठना यह किस्मत अथवा दानशीलता की बात नहीं है, बल्कि यह गरीबों का अधिकार है।

     

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